डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में उठे सियासी घमासान के बीच चिराग पासवान की लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से विदाई हो गई है। पशुपति पारस आधिकारिक तौर पर एलजेपी के ससदीय दल के नेता बन गए हैं। सोमवार देर शाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने पशुपति पारस को एलजेपी के संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता दी।

बता दें कि पशुपति पारस दिवंगत नेता रामविलास पासवान के छोटे भाई है। एलजेपी के छह सांसदों में से पांच सांसदों ने पारस के नेतृत्व में पार्टी से बगावत कर दी है। चिराग पासवान को किनारे करते हुए इन सांसदों ने पशुपति को 13 जून को अपना नेता चुना था। पशुपति पारस को लोकसभा में एलजेपी का नेता चुनने वालों में चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह और प्रिंस राज शामिल थे। इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा था। इस पत्र के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें संसदीय दल के नेता के रूप मे मान्यता दी।

इससे पहले दिन में पशुपति पारस ने कहा कि सभी की इच्छा थी कि 2014 की तरह पार्टी एनडीए में बनी रहे, लेकिन पार्टी में असामाजिक तत्व आ रहे थे और एलजेपी बिखरती चली गई। उन्होंने कहा कि मुझे चिराग से कोई दिक्कत नहीं है। चिराग अभी भी पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे हमारे साथ आना चाहें तो आ सकते हैं। पशुपति ने कहा कि पार्टी तोड़ी नहीं है, उसे बचाया है। जब तक जिंदा हूं, एलजेपी को जिंदा रखूंगा। पशुपति पारस ने नीतीश कुमार को विकास पुरुष बताया।

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Author: Bulandaawaj

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