नई दिल्ली
29 जुलाई से शुरू होने जा रहे दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र को लेकर मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के नेताओं की एक अहम बैठक हुई। विपक्षी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि गुरुवार से शुरू होने जा रहे सत्र की अवधि बढ़ाकर कम से कम पांच दिन की जाए। अभी केवल दो दिन के लिए ही सत्र बुलाया गया है। इसके अलावा विपक्षी विधायकों ने दिल्ली की जनता से जुड़े 7 महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विधानसभा में चर्चा कराए जाने की मांग की है। विपक्षी विधायकों का आरोप है कि दिल्ली की समस्याओं और दिल्लीवालों के दुख-दर्द को लेकर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सरकार के रवैये के चलते ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।

विपक्षी विधायकों ने मिलकर की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस
विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मंगलवार को विधानसभा में हुई बैठक के बाद विपक्षी विधायकों के साथ मिलकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि हमने विधानसभा में नियम 55 के तहत कई विषयों पर अल्पकालिक चर्चा कराने का नोटिस दिया है। दिल्ली में पीने के पानी का गंभीर संकट है, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, प्रदूषण के चलते दिल्ली हर साल गैस चैंबर में तब्दील हो जाती है, डीटीसी की लगभग सभी बसों की मियाद पूरी होने से परिवहन व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है, बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही है, राशन वितरण के सिस्टम में कई खामियां हैं, कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं और अब मॉनूसन के दौरान नालों की सफाई नहीं होने के कारण दिल्ली फिर से डूब रही है। ये सभी दिल्ली के ज्वलंतशील मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा कराए जाने का अनुरोध विधानसभा अध्यक्ष से किया गया है।

‘नोटिस पर चर्चा नहीं होती’
विपक्षी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा है कि दिल्ली के इतने सारे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा सिर्फ दो दिन के सत्र में नहीं हो सकती है, इसलिए सत्र की अवधि बढ़ाकर कम से कम पांच दिन की जाए, ताकि दिल्ली की समस्याओं पर खुलकर बहस हो सके। विधानसभा अध्यक्ष से इस बात को लेकर शिकायत भी की गई है कि विपक्षी विधायक जिस भी विषय पर चर्चा के लिए नोटिस देते हैं, उस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी जाती है। बीजेपी विधायकों ने मांग की है कि इस बार उन्हें जनहित के मुद्दे उठाने से रोका न जाए। बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार विधानसभा का इस्तेमाल दिल्ली की समस्याओं को हल करने के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने और केंद्र सरकार या एमसीडी की निंदा करने के लिए करती है। विपक्षी विधायकों ने दिल्ली सरकार पर उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए बजट जारी न करने का आरोप भी लगाया है।

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Author: Bulandaawaj

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