नई दिल्ली: नई दिल्ली से बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी को विदेश और संस्कृति मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाए जाने के फैसले को दिल्ली में बीजेपी की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस फैसले के पीछे सरकार और पार्टी की क्या सोच रही, इसे लेकर तमाम कयास भी लगाए जा रहे हैं। कारणों की पड़ताल की जा रही है। यह आकलन भी किया जा रहा है कि इन बदलावों का दिल्ली में बीजेपी की राजनीति पर कितना और कैसा असर पड़ेगा।

जानकारों के मुताबिक, बीजेपी 2014 से ही दिल्ली में लोकसभा की सातों सीटें जीतती आई हैं। सबसे सीनियर नेता होने के नाते पिछली बार भी डॉ. हर्षवर्धन को मोदी सरकार में जगह मिली थी और इस बार भी वही सरकार में जगह बनाने में कामयाब हुए। लेकिन कोरोना काल के बाद पैदा हुई नई चुनौतियों ने बाजी पलट दी।
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बताया जा रहा है कि जबसे मोदी सरकार के संभावित विस्तार की खबरें आनी शुरू हुईं, तभी से दूसरी बार चुनाव जीतकर आए दिल्ली के अन्य सांसद भी कैबिनेट में जगह पाने के प्रयासों जुट गए थे। इनमें प्रवेश वर्मा, दिल्ली में बीजेपी के पूर्वांचली चेहरे मनोज तिवारी और पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में था। मगर डॉ. हर्ष वर्धन जैसे सीनियर नेता को हटाकर लेखी को मंत्री बनाए जाने के फैसले से कार्यकर्ता ज्यादा हैरान हैं और इसकी वजह समझने की कोशिश कर रहे हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार में इस बार जिस तरह से देश के तमाम राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया, उसके तहत दिल्ली के खाते में एक पद तो आना ही था। युवा चेहरों को मौका देकर राज्यों में भी भविष्य की लीडरशिप तैयार करने पर भी काफी जोर रहा। उसी के तहत इस बार पढ़े-लिखे, अपेक्षाकृत कम उम्र वाले और तेजतर्रार नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली। क्योंकि महिलाओं को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना था, ऐसे में डॉ. हर्षवर्धन के रिप्लेसमेंट में रूप में मीनाक्षी लेखी तमाम पैमानों पर फिट पाई गईं।

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उनका पंजाबी समुदाय से ताल्लुक रखना भी महत्वपूर्ण फैक्टर माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, पिछले डेढ़ दशक से दिल्ली में न तो पंजाबी समुदाय के किसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और न केंद्र सरकार में कोई प्रतिनिधित्व मिला। मदनलाल खुराना के बाद दिल्ली का ऐसा कोई पंजाबी चेहरा नहीं है, जिसे पार्टी या सरकार में आगे बढ़ने का मौका दिया गया हो। इसे लेकर दिल्ली के पंजाबी समुदाय के नेताओं में अंदर लंबे समय से नाराजगी चल रही थी। अपनी उपेक्षा से नाराज इस समुदाय के नेता लंबे समय से सरकार या पार्टी संगठन में जगह बनाने की कोशिशों में लगे थे। ऐसे में पंजाबी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली लेखी को सरकार में जगह देना कहीं न कहीं दिल्ली के पंजाबी समुदाय को साधने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। लेखी का एजुकेशनल और प्रोफेशनल बैकग्राउंड, हिंदी और अंग्रेजी- दोनों भाषाओं पर उनकी मजबूत पकड़, मुद्दों को समझने की उनकी क्षमता और एक तेजतर्रार और प्रखर प्रवक्ता के रूप में उनकी पहचान, ये सब भी उनके काफी काम आए। साथ ही महिला फैक्टर भी उनके पक्ष में गया। आने वाले एमसीडी चुनावों में, जहां महिला उम्मीदवारों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है, लेखी के जरिए पार्टी उनके बीच यह संदेश देने में भी सफल रहेगी कि अच्छा काम करने वाली महिलाओं को संगठन और सरकार में आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलेगा।

मीनाक्षी लेखी को पद मिलने से पंजाबियों की नाराजगी दूर होने की उम्मीद

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Author: Bulandaawaj

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