विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने एमसीडी पर आरोप लगाया है कि वो ऑनलाइन क्लासेज नहीं करने वाले बच्चों को राशन नहीं दे रही है। ‘आप’ नेता दुर्गेश पाठक ने कहा है कि बीजेपी शासित एमसीडी ने पिछले एक-डेढ़ साल से बच्चों का राशन रोका हुआ है। पाठक ने मांग की कि ऑनलाइन क्लासेज की शर्त हटाकर सभी बच्चों में राशन बांटा जाए।

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दुर्गेश पाठक ने बुधवार को कहा कि एमसीडी ने ऑर्डर निकाला है कि वो उन बच्चों को राशन नहीं देगी जो ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले रहे। पाठक ने कहा कि पिछले एक-डेढ़ साल से एमसीडी ने बच्चों का राशन रोका हुआ है और जब बांटने को तैयार हुए तो ऐसी अमानवीय शर्त जोड़ दी है। दिल्ली के सबसे गरीब बच्चे, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चे ही एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। लगभग 3 लाख बच्चे एमसीडी के स्कूलों में पढ़ते हैं। इसमें से 40-50% बच्चे ऑनलाइन क्लास नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि इन बच्चों के पास न तो स्मार्टफोन है और न ही इंटरनेट।

पाठक ने कहा कि हमने एमसीडी से कई बार निवेदन किया कि मिड डे मील का राशन बच्चों में वितरित करें। इसे लेकर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपील की थी, मगर एमसीडी पिछले एक-डेढ़ साल से राशन नहीं बांट रही है। उन्होंने कुछ दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि मंगलवार को इन्होंने राशन वितरण का एक ऑर्डर निकाला है। हमारे पार्षदों ने सदन में और स्टैंडिंग कमिटी के सामने भी यह मुद्दा उठाया। हमने प्रदर्शन भी किया। उस वक्त उन्होंने कारण यह बताया कि इस प्रक्रिया में जो एनजीओ शामिल हैं, उनका टेंडर फाइनल नहीं हो पा रहा है इसलिए हम राशन वितरित नहीं कर पा रहे हैं। जबकि इस ऑर्डर में इन्होंने साफ कहा है कि यह टेंडर सीधा-सीधा उठा सकते हैं। इसमें किसी और प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। इसका मतलब है कि या तो बीजेपी फैसला लेने में चूक रही थी, या तो पैसे की हेर-फेर का मामला था।

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उधर, दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने ऑनलाइन क्लास में शामिल होने में असमर्थ छात्रों को मिड डे मील राशन न देने का कोई आदेश नहीं निकाला है। सभी बच्चों को यह राशन मिलता रहेगा। दुर्गेश पाठक ऐसे भ्रामक बयान किस आधार पर देते हैं, यह समझ से परे है और साफ है कि इस अनर्गल बयानबाजी का मकसद केवल उत्तरी दिल्ली नगर निगम को राजनीतिक रूप से बदनाम करना है।

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Author: Bulandaawaj

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