हाइलाइट्स:

  • कोरोना के खतरे के मद्देनजर CBSE की 12वीं की परीक्षा रद्द
  • दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने फैसले का स्वागत किया
  • सिसोदिया ने 12वीं के बच्चों को पास करने का फॉर्म्युला भी सुझाया

नई दिल्ली
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने CBSE बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। परीक्षाओं के रद्द होने के बाद इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि बच्चों को पास करने का फॉर्म्युला क्या होगा। अलग-अलग लोग इस मामले पर अपनी राय दे रहे हैं। अब दिल्ली के डेप्युटी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी बच्चों के पास करने का एक फॉर्म्युला सामने रखा है।

बच्चों की अनिश्चितता और एंग्जाइटी खत्म हुई
डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘यह फैसला हमें अच्छा लगा है क्योंकि देश के 1.5 करोड़ बच्चों के हित में फैसला हुआ है। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, उनके अभिभावकों की चिंता को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि 12वीं क्लास के बच्चों के लिए अनिश्चितता और एंग्जाइटी खत्म हो गई है। अब बच्चे इस बात को लेकर निश्चित हो गए हैं कि सीबीएसई जो भी फॉर्म्युला निकालेगा, उसके आधार पर हम पास हो जाएंगे। हम लोग पहले से मांग कर रहे थे कि एग्जाम कराने की जिद बच्चों पर भारी पड़ेगी।’
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’12 साल से जो बच्चा हमारे पास है उसके बारे में अच्छे से जानते हैं’
सिसोदिया ने आगे कहा, ‘हमने सेंट्रल गवर्नमेंट को कहा हुआ है कि जब शिक्षा मंत्रियों की मीटिंग हुई थी तो कई राज्य बच्चों के एग्जाम कराने के लिए तैयार थे, लेकिन हमने एग्जाम रद्द करने की बात इसलिए की थी कि हमारे पास ये बच्चा पहली बार नहीं आया है। ये बच्चा 12 साल से हमारे पास है, हम जानते हैं कि ये बच्चा पढ़ने में कैसा है, बहुत सारे एग्जाम ले चुके हैं हम इसके, बहुत सारे छोटे-बड़े टेस्ट ले चुके हैं, प्रैक्टिकल करा चुके हैं, ओवरऑल नॉलेज बेस उसका हमारे पास है, ये कोई पहली क्लास का बच्चा नहीं है जो पहली बार हमारे पास आया है और हमें उसके बारे में पता नहीं है। यानी एजुकेशन सिस्टम के पास कम से कम 12 साल से वह बच्चा है तो उसके पास्ट परफॉर्मेंस को आधार बनाएं, हिस्टोरिकल रिफरेंस लें। 10वीं, 11वीं और 12वीं की परीक्षाओं, इंटरनल असेसमेंट, प्री बोर्ड एग्जाम, प्रैक्टिकल, असाइनमेंट्स को वेटेज देते हुए फॉर्म्युला निकाला जा सकता है। मुझे लगता है कि यह कहीं ज्यादा बेहतर होगा मूल्यांकन के लिए बनिस्बत 3 घंटे की एक परीक्षा की तुलना में।’

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बच्चों के पास होगा अपना रिजल्ट सुधारने का ऑप्शन
मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं पर ज्यादा ध्यान देते हैं जबकि इंटरनल असेसमेंट पर कम ध्यान देते हैं। इसलिए हमारी जो मांग थी, सीबीएसई ने इसे माना भी है कि बच्चों को ऑप्शन दिया जाएगा कि अगर हिस्टोरिकल परफॉर्मेंस पर पास होना चाहते हैं, मेरा मानना है कि 80 से 85 फीसदी बच्चे ये सिस्टम अडॉप्ट करेंगे। ज्यादा से 20 फीसदी बच्चे ऐसे होंगे जो कहेंगे कि नहीं हम एग्जाम देना चाहते हैं। तो जो संख्या पहले 1.5 करोड़ की थी वह अब बहुत छोटी रह जाएगी। जो 20 फीसदी बच्चे होंगे पास होने के बाद भी उनके पास ऑप्शन होगा कि वे अपना रिजल्ट सुधारना चाहते हैं तो सुधार सकते हैं।

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‘अगले साल की तैयारी अभी से करनी चाहिए’
मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि 10वीं और 12वीं क्लास ऐसी है जो हर साल हमारे आकर खड़ी हो जाती है। जैसे कोरोना की तीसरी लहर की बात चल रही है, उससे यह साफ है कि यह इतनी आसानी से जाने वाला नहीं है। ऐसे में बेहतर होगा कि अगले साल के विकल्प के लिए हम अभी से तैयारी कर लें। यानी जो बच्चें 9वीं पास करके 10वीं में आ रहे हैं या 11वीं पास करके 12वीं में आ रहे हैं, अगले साल उनके एग्जाम कराने का फॉर्म्युला क्या हो, इसे हम अभी से तय कर लें। इस साल का जो होना था हो गया लेकिन अगले साल के लिए हमें अभी से तैयारी कर लें, ऐसा न हो कि अगले साल मार्च अप्रैल में हम फिर इसी स्थिति में खड़े हों।

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‘हम कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी कर रहे’
स्कूल खुलने की संभावना पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। पहले तो बच्चों के रिजल्ट निकल आएं और अगले साल में उनका प्रमोशन हो जाए। इस बीच हम दिल्ली में वैक्सीनेशन भी तेजी से कर रहे हैं तो करीब एक महीने बाद ही हम इसका आकलन कर सकते हैं कि स्कूल खोले जा सकते हैं कि नहीं। हम कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनदर भी जोरों से तैयारी कर रहे हैं। पिछली दो लहर में दिल्ली में जो कमियां रहीं स्वास्थ्य को लेकर उनको दूर करना है। तीसरी लहर में हमें किन चीजों की जरूरत पड़ सकती है उसको लेकर भी हमारी टीम काम कर रही है।

Manish-Sisodia

मनीष सिसोदिया (फाइल फोटो)

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Author: Bulandaawaj

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