हाइलाइट्स:

  • एक बार फिर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में ठनी
  • घर-घर राशन पहुंचाने वाली योजना को केंद्र ने किया रिजेक्ट
  • हमने प्रपोजल भेजा नहीं तो रिजेक्ट कैसे हुआ- मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली
केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच एकबार फिर ठन गई है। इस बार दिल्ली में गरीबों को घर-घर राशन पहुंचाने की योजना को लेकर दोनों सरकारे आमने-सामने आ गई हैं। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पीएम मोदी पर सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की एक चिट्ठी आई है, जिसमें लिखा है कि आपका गरीब लोगों को घर-घर जाकर राशन बांटने का प्रपोजल रिजेक्ट किया जाता है।

मनीष सिसोदिया का सवाल
मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमने तो कभी प्रपोजल भेजा ही नहीं था। हमने जब प्रपोजल ही भेजा तो आपने रिजेक्ट कैसे कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में गरीब लोगों का राशन उनके घर पर पहुंच सके जैसे पिज़्ज़ा और कपड़े डिलीवर होते हैं इसके लिए एक योजना अरविंद केजरीवाल ने बनवाई थी, लेकिन केंद्र ने इस पर रोक लगा दी थी।

केजरीवाल का सरकार पर हमला
इस मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने लिखा है कि हर वक्त हर किसी से झगड़ा सही नहीं- ट्विटर, लक्श्द्वीप, ममता दीदी, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली सरकार, किसानों, व्यापारियों, पश्चिम बंगाल के चीफ़ सेक्रेटेरी तक से झगड़ा इतना झगड़ा, हर वक्त राजनीति से देश आगे कैसे बढ़ेगा? घर घर राशन योजना राष्ट्रहित में है। इस पर झगड़ा मत कीजिए।

सरकार पर हमला
अरविंद केजरीवाल ने एक और ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि केंद्र की चिट्ठी आयी है। बेहद पीड़ा हुई। इस क़िस्म के कारण देकर हर घर राशन योजना ख़ारिज कर दी। राशन गाड़ी ट्रैफ़िक में फंस गयी या ख़राब हो गयी तो। तीसरी मंज़िल तक राशन कैसे जाएगा। 21वीं सदी का भारत चांद पर पहुंच गया, आप तीसरी मंज़िल पर अटक गए। संकरी गली में कैसे जाएगा।

झगड़ालू पीएम नहीं देखा- पीएम
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण की जिम्मेदारी राज्य की है। अगर लोगों के घरों में पिज्जा, कपड़े और अन्य वस्तुएं पहुंचाई जा सकती हैं, तो राशन उनके घर तक क्यों नहीं पहुंचाया जा सकता है?’ पश्चिम बंगाल और महारष्ट्र सरकार से केंद्र के विवाद का जिक्र करते हुए सिसोदिया ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि वह क्यों हमेशा झगड़ने के मूड में रहते हैं। देश ने पिछले 75 साल में ऐसा झगड़ालू प्रधानमंत्री नहीं देखा है।’

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Author: Bulandaawaj

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