हाइलाइट्स

  • आज दिल्ली कैबिनेट की मीटिंग में आएगा विधायकों के वेतन का मामला
  • करीब 10 साल से नहीं बढ़ी है दिल्ली के विधायकों की सैलरी
  • तेलंगाना में विधायकों को सबसे अधिक 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान होता है
  • उत्तराखंड में 1.98 लाख, हिमाचल में 1.90 लाख, हरियाणा में 1.55 लाख रुपये है सैलरी

नई दिल्ली
दिल्ली के विधायकों का वेतन भी दूसरे राज्यों की तरह हो, इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार सहमत नहीं हुई। दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने कैंची चलाई है और मामूली बढ़ोतरी की ही इजाजत है। यानी देश के बाकी राज्यों की तुलना में दिल्ली के विधायकों का वेतन अब भी सबसे कम रहेगा।

10 साल से नहीं बढ़ी सैलरी

दिल्ली कैबिनेट की आज होने वाली बैठक में केंद्र से मंजूर वेतन बढ़ोतरी के फॉर्म्युले पर चर्चा होगी। दिल्ली के विधायकों के वेतन में पिछले 10 साल से बढ़ोतरी नहीं हुई है। नवंबर 2011 में सैलरी बढ़ाकर 54,000 रुपये की गई थी। 2015 में दिल्ली विधानसभा ने विधायकों की सैलरी में संशोधन संबंधी यह बिल पास किया था। इस बिल के आधार पर केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार को विधायकों की वेतन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उसके बाद से लगातार यह मामला लटकता आ रहा है। अब बताया जा रहा है कि केंद्र की ओर से वेतन में मामूली बढ़ोतरी की ही इजाजत दी गई है।

36,000 की मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी

दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने अन्य राज्यों के मुकाबले वेतन करने का प्रस्ताव किया था, जिसे केंद्र सरकार ने नामंजूर कर दिया है। केंद्र की ओर से जो मंजूरी मिली है, उसके बाद अब दिल्ली के विधायकों को अब भी सबसे कम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेगा और इसमें 60 हजार रुपये के भत्तों को जोड़ दें तो यह 90 हजार रुपये महीना होगा। अभी सैलरी 12 हजार रुपये जबकि 42,000 रुपये भत्तों के रूप में मिलते हैं।

विधायकों को मिल सकती है इतनी सैलरी

वेतन ₹30,000
चुनाव क्षेत्र भत्ता ₹25,000
सचिवालयी भत्ता ₹15,000
टेलिफोन भत्ता ₹10,000
वाहन भत्ता ₹10,000
कुल ₹90,000


देश में सबसे कम दिल्ली के विधायकों की सैलरी

दिल्ली सरकार के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि देश के सभी राज्यों में सबसे कम वेतन पाने वालों में अब भी दिल्ली के विधायक होंगे। दूसरे कई राज्य अपने विधायकों को दिल्ली के विधायकों की तुलना में डेढ़ से ढाई गुना वेतन और भत्ते देते हैं। अधिकारी का कहना है कि उत्तराखंड में (2.04 लाख रुपये), हिमाचल प्रदेश (1.90 लाख रुपये), हरियाणा (1.55 लाख रुपये), बिहार (1.35 लाख रुपये) में हर महीने वेतन और भत्ते विधायकों को दिए जाते हैं। राजस्थान में 1.42 लाख रुपये और तेलंगाना में विधायकों को सबसे अधिक 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान होता है।

किस राज्य में विधायकों को कितनी सैलरी

केरल ₹70,000
गुजरात ₹1,50,000
बिहार ₹1,35,000
पंजाब ₹84,000
ओडिशा ₹1,00,000
तेलंगाना ₹2,50,000
आंध्र प्रदेश ₹1,75,000
तमिलनाडु ₹1,05,0000
गोवा ₹1,99,000
मध्य प्रदेश ₹1,10,0000
छत्तीसगढ़ ₹80,000
कर्नाटक ₹1,65,000
पश्चिम बंगाल ₹81,800
हिमाचल प्रदेश ₹1,90,000
उत्तराखंड ₹2,04,00
हरियाणा ₹1,55,000


आधी भी नहीं मानी गई मांग

दिल्ली के विधायकों की सैलरी बढ़ाकर 2.10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया था। 2017 में केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के विधायकों की सैलरी में इजाफा करने से जुड़े बिल को वापस भेज दिया था। केंद्र ने कहा था कि दिल्ली सरकार ‘वैधानिक प्रक्रिया’ के तहत इस बिल को दोबारा सही फॉर्मेट में भेजे। उसके बाद फिर से यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया और अप्रैल 2020 में केंद्र ने इसे फिर सरकार के पास भेज दिया था। दिल्ली सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया था। गृह मंत्रालय ने वेतन में भारी कटौती कर मामूली बढ़ोतरी की इजाजत दी है।

दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि कई राज्य अपने विधायकों को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते प्रदान करते हैं, जो दिल्ली सरकार नहीं प्रदान करती है। जैसे-हाउस रेंट भत्ता, कार्यालय किराया और कर्मचारियों के खर्च, कार्यालय उपकरणों को खरीदने के लिए भत्ता, उपयोग के लिए गाड़ी, चालक भत्ता आदि।

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Author: Bulandaawaj

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