विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री का कहना है कि बीजेपी शासित एमसीडी ने दिल्ली एमसीडी के स्कूलों की शिक्षा के स्तर को नीचे गिराया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की UDISE (यूनिनफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) प्लस रिपोर्ट से ही पता चलता है कि दिल्ली एमसीडी के स्कूल देश के सबसे पिछड़े स्कूल हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के 98% स्कूलों में राइट टु एजुकेशन (RTE) एक्ट के मानकों के अनुसार टीचर-स्टूडेंट रेश्यो है, वहीं बीजेपी शासित दिल्ली एमसीडी के लगभग 50% स्कूलों में मानकों के अनुसार ये रेश्यो नहीं है। सिसोदया ने कहा कि बीजेपी शासित एमसीडी ने अपने 20 साल के कुशासन में शिक्षा का मजाक बनाया है और इससे पूरे देश में दिल्ली की छवि खराब हो रही है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अब तो मोदी सरकार ने भी अपनी इस रिपोर्ट में मान लिया है कि पिछले 20 सालों में बीजेपी शासित दिल्ली एमसीडी ने एमसीडी के स्कूलों का बेड़ा गर्क कर दिया है। और स्कूलों की इतनी बुरी हालत हो चुकी है कि दिल्ली एमसीडी के स्कूल आज देश के सबसे पिछड़े स्कूल बन चुके है। इससे दिल्ली की छवि खराब हो रही है। शिक्षा को लेकर अपने नाकारापन और उदासीनता से बीजेपी शासित दिल्ली एमसीडी ने अपने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है।

MCD स्कूलों के ऑनलाइन क्लास में 30 प्रतिशत भी स्टूडेंट नहीं
उपमुख्यमंत्री ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार के 98% स्कूलों में RTE के मानकों के अनुसार टीचर स्टूडेंट रेश्यो है। लेकिन ईस्ट एमसीडी के 58% स्कूलों, नॉर्थ एमसीडी के 46% स्कूलों व दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के 39% स्कूलों में यह रेश्यो, RTE एक्ट के मानकों के अनुसार नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में एक ओर जहां दिल्ली सरकार के स्कूलों की बिल्डिंग्स को वर्ल्डक्लास बनाया गया है, नए स्कूल बनाए जा रहे है,स्कूल सभी बुनियादी सुविधाओं से लैस है, शिक्षकों की लगातार नियुक्तियां की जा रही है, बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए नए-नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गईं है, शिक्षकों को विदेशों में ट्रेनिंग दी जा रही है। उसके विपरीत बीजेपी शासित दिल्ली एमसीडी अपने स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को न तो टीचर्स उपलब्ध करवा पा रही है और न ही अपने स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं तक मुहैय्या करवा पा रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद वट्सऐप यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले बीजेपी के नेताओं को अपने गिरेबान में झांकने की ज़रूरत है।

अच्छे नतीजे दे रहे एमसीडी के स्कूल : बीजेपी
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के हवाले से तीनों एमसीडी के स्कूलों की खराब हालत वाले उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी ने दावा किया है कि उसी रिपोर्ट के कई बिंदुओं में एमसीडी स्कूलों का प्रदर्शन दिल्ली सरकार के स्कूलों से बेहतर पाया गया है, लेकिन इस बात को वह छुपा गए। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि वित्तीय संकट के बावजूद एमसीडी स्कूल दिल्ली सरकार के स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन और नतीजे दे रहे हैं।

कपूर ने कहा कि निगम के स्कूलों में ज्यादातर समाज के आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, फिर भी इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जो साफ दर्शाता है कि निगम स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर है। दिल्ली सरकार के 75 प्रतिशत स्कूल में 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान नहीं पढ़ाया जाता है, जबकि 65 प्रतिशत स्कूलों में कॉमर्स तक नहीं पढ़ाई जाती है, जबकि एमसीडी अपने प्राथमिक स्कूलों में भी बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा दे रही है। जहां तक टीचरों और स्टूडेंट्स का रश्यो कम होने का सवाल है, तो कपूर के मुताबिक, उसका मुख्य कारण यह है कि दिल्ली सरकार ने नगर निगमों के फंड्स रोके हुए हैं, जिसकी वजह से नए टीचरों की भर्ती नहीं हो पा रही है

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Author: Bulandaawaj

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