नई दिल्ली
पिछले साल दिल्ली के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार और उसके बाद हाल ही में संपन्न हुए एमसीडी के 5 वॉर्डों के उप-चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद बीजेपी को अब अगले साल तीनों निगमों में होने वाले चुनावों की चिंता सता रही है। रविवार को संपन्न हुई दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहीं न कहीं यह माना कि तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी को चुनावों में उस तरह के परिणाम हासिल नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी।

ऐसे में आगामी निगम चुनावों में जीत हासिल करने के लिए निचले स्तर पर पार्टी संगठन को और मजबूत करने व निचले स्तर पर काम कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने पर जोर देने के लिए कहा गया।

ग्‍लैमर के पीछे न भागे कार्यकर्ता
सूत्रों के मुताबिक, कार्यकारिणी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि निचले स्तर पर पार्टी के आधार को और मजबूत बनाने के लिए पन्ना प्रमुख और समितियों को और मजबूती के साथ काम करने की जरूरत है। पार्टी नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि तमाम कोशिशों के बावजूद बीजेपी दो दशकों से भी ज्यादा समय से दिल्ली की सत्ता से बाहर है। इसके कारणों का विश्लेषण करते हुए वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि दिल्ली का कार्यकर्ता ग्लैमर के पीछे ज्यादा भागता है। जिस दिन वह कार्यकर्ता पद के बजाय पार्टी और उसकी प्रतिष्ठा के लिए काम करने लगेगा, उसके बाद बीजेपी को दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने से कोई नहीं रोक पाएगा।

पार्टी नेताओं ने माना कि चुनावी नतीजे इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि निचले स्तर पर पार्टी संगठन की स्थिति अच्छी नहीं है और इसलिए बूथ और वॉर्ड लेवल पर और ज्यादा काम करने की जरूरत है। खासतौर से पन्ना प्रमुखों और बूथ समितियों के सदस्यों को और ज्यादा एक्टिव करने पर जोर देने की बात कही गई। मीटिंग में कार्यकारिणी के सदस्यों ने कई सुझाव भी सामने रखे, लेकिन प्रदेश के नेतृत्व और कामकाज पर किसी ने कोई विशेष टिप्पणी नहीं की। राजनाथ सिंह, वी सतीश, अलका गुर्जर जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि बूथ कार्यकर्ता और पन्ना प्रमुख हमारी ताकत हैं। हमें अपनी इस ताकत को पहचान कर उसे और बढ़ाना है। उसी से पार्टी की जीत सुनिश्चित होगी।

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Author: Bulandaawaj

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