नई दिल्ली : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी की ओर से 60 दिनों के अंदर गुरुद्वारा बाला साहिब में बनाया गया वर्ल्ड क्लास कोविड अस्पताल का उद्घाटन अब 13 अगस्त को नहीं होगा। यह जानकारी बुधवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद कमिटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने दी है। गुरुद्वारा कमिटी का आरोप है कि अस्पताल को आचार संहिता का उल्लंघन करने का हवाला देते हुए विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल (सरना) ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 9 अगस्त को गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने भी आदेश जारी कर अस्पताल का उद्घाटन रोकने के लिए प्रबंधकों को कहा था। ऐसे में अब 22 अगस्त को होने वाले कमिटी के आम चुनाव में ये बड़ा मुद्दा बनने वाला है। विपक्ष इस फैसले को एक-दो दिन में चैलेंज करने की बात कर रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, गुरुद्वारा कमिटी का दावा है कि बाला साहिब अस्पताल 19 वर्षों बाद शुरू होने जा रहा था। हर चुनाव में इसको बनाने के वादे किए गए लेकिन काम नहीं हुआ। इस अस्पताल परिसर में पहले देश का सबसे बड़ा डायलिसिस अस्पताल शुरू किया गया था। इसके साथ ही 125 बिस्तरों वाला कोरोना अस्पताल बनाया जा रहा है। अकाली दल बादल इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर रहा है। बाला साहिब अस्पताल के मामले में मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह 125 बेड का अस्पताल कौम की जायदाद है। सिरसा ने आरोप लगाया कि 12 वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान परमजीत सिंह सरना और 6 वर्ष के कार्यकाल के दौरान मनजीत सिंह जीके ने इस अस्पताल के निर्माण के लिए कोई ध्यान नहीं दिया। अब जबकि मौजूदा कमिटी यह सपना पूरा करने वाली थी तो विरोधी दलों ने रोड़ा अटका दिया है।

सिरसा ने कहा कि यह अस्पताल भारत का एकमात्र अस्पताल है, जिसके लिए विदेश की सरकारों ने भी यह कह कर योगदान डाला कि दिल्ली गुरुद्वारा कमिटी मानवता की सेवा कर रही है। फ्रांस की सरकार ने ढाई करोड़ रुपये का ऑक्सिजन प्लांट भेजा, ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने 3 लाख डॉलर भेजे, अमेरिका की सरकार ने वेंटिलेटर भेजे, इंग्लैंड सहित दुनिया की अन्य सरकारों ने इसके लिए योगदान डाला और प्रवासी पंजाबियों ने बहुत बढ़-चढ़ कर योगदान दिया। चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होने की बात पर सिरसा ने कहा कि कोरोना, आचार संहिता को पूछ कर नहीं आया। जब अप्रैल में चुनाव टाले गए थे तो केवल कोरोना के कारण ही टले थे। हमने भी कोरोना से बचाव के लिए ही अस्पताल बनाया है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि वह अस्पताल बनने का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद बनाए जा रहे अस्पताल का विरोध कर रहे हैं। यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

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10 दिन बाकी…गरमा गई है राजनीति
अब चुनाव में सिर्फ 10 दिन का वक्त रह गया है। राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। सभी कैंडिडेट एक बार फिर चुनावी मैदान में लास्ट टाइम कैंपेनिंग के लिए उतर गए हैं। सोशल मीडिया से लेकर घर-घर जाकर वोट मांगे जा रहे हैं और अपने-अपने टाइम में किए गए कामों का ब्योरा संगत के सामने रखा जा रहा है। गुरुद्वारा चुनाव के इतिहास में पहली बार है तीन प्रधान…सिरसा (मौजूदा प्रधान), हरविंदर सरना (पूर्व प्रधान) और मनजीत जीके (पूर्व प्रधान) चुनावी मैदान में अपने दम पर उतरे हैं। सिरसा पंजाबी बाग सीट से सरना दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद उनके छोटे भाई हरविंदर सरना को टक्कर देंगे। इस सीट पर जागो ने अपना कोई कैंडिडेट नहीं उतारा है। वहीं जागो के प्रधान मनजीत सिंह का ग्रेटर कैलाश सीट पर केहर सिंह के बेटे चरणजीत सिंह का सीधा मुकाबला होने वाला है क्योंकि सरना दल ने इस सीट पर अपना कोई कैंडिडेट नहीं उतारा है।

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Author: Bulandaawaj

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