हाइलाइट्स

  • सौरभ ने कहा, एमसीडी ने अपने 36 में से 14 स्कूलों को बेचने के लिए टेंडर निकाल दिया है
  • केजरीवाल सरकार 25 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च करती है, वहीं एमसीडी सिर्फ डेढ़ फीसदी
  • सौरभ भारद्वाज आरोप लगाने से पहले तथ्यों की ठीक तरीके से जांच भी नही करते हैः बीजेपी

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एमसीडी की संपत्तियों को बेचे जाने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं और अब एमसीडी के सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग को भी बेचा जा रहा है। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी ने कहा कि ऐसा लगता है कि नगर निगमों को बदनाम करने के उत्साह में सौरभ भारद्वाज आरोप लगाने से पहले तथ्यों की ठीक तरीके से जांच भी नही करते है। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अपना कोई भी चल रहा स्कूल कोचिंग सेंटरों को लीज पर देने का कोई निर्णय नही लिया है।
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आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीजेपी शासित एमसीडी ने 36 में से 14 स्कूलों को निजी कोचिंग सेंटरों को बेचने के लिए टेंडर निकाल दिया है। पहले चरण में नरेला, सिटी सदर पहाड़गंज जोन, सिविल लाइंस जोन और करोल बाग जोन के स्कूलों की बिल्डिंग को निजी कोचिंग सेंटरों को देने की कोशिश की जा रही है। सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केजरीवाल सरकार जहां 25 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च करती है, वहीं एमसीडी सिर्फ डेढ़ फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च करती है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में बच्चों का रजिस्ट्रेशन हर साल बढ़ रहा है, वहीं नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे 3 लाख से घटकर 2.30 लाख हो गए हैं। कई स्कूलों में तो बहुत ही कम बच्चे रह गए हैं और उनके पास इतने छात्र भी नहीं बचे हैं कि उन स्कूलों को चला सकें। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता से सवाल पूछते हुए आप नेता ने कहा कि क्या कारण है कि एमसीडी के स्कूलों में शिक्षा की इतनी बदहाल स्थिति है?

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आप नेता ने एमसीडी की संपत्तियों को कथित रूप से बेचे जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि बीजेपी वालों को अब जब लग रहा है कि आने वाले चुनाव में नगर निगम से उनका सूपड़ा साफ होने जा रहा है तो हर चीज को बेचकर भागने की स्कीम के तहत काम किया जा रहा है। एमसीडी की मुख्य स्थानों की जमीनों को एक तिहाई, चौथाई दामों पर अपने लोगों को बेच रहे हैं। इसके अलावा अस्पतालों, डिस्पेंसरी को निजी लोगों को क्लीनिक चलाने के लिए बेच रहे हैं। पार्कों के अंदर दुकानें लगाने की तैयारी कर रहे हैं। सड़कों पर नए तरीके के कियोस्क और फूड वैन की योजना बनाई है।

उन्होंने कहा कि जमीन, अस्पताल, पार्क, सड़क बेचने के बाद अब नंबर स्कूलों का है। केजरीवाल सरकार पूरे देश में दिल्ली के शिक्षा मॉडल के बारे में बताती है। हर जगह चर्चा होती है कि दिल्ली में शिक्षा का कायाकल्प हो रहा है। वहीं दिल्ली में नर्सरी से लेकर कक्षा 5 तक प्राथमिक शिक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली नगर निगम के पास है और निगम के स्कूलों की बहुत खराब हालत है। निगम का पूरा बजट 6872 करोड़ का है। इसका केवल 1.5 फीसदी बजट शिक्षा को दिया जाता है, यानि सिर्फ 116 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं।

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कोई भी चल रहा स्कूल कोचिंग सेंटरों को नहीं दिया: बीजेपी
दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा, नॉर्थ एमसीडी के बहुत से स्कूल, खासकर पुरानी दिल्ली सिटी जोन के क्षेत्र में रिहाइशी आबादी खत्म होने के बाद से खाली हो गए हैं और केवल ऐसे कुछ स्कूल भवनों को सीमित समय के लिए शिक्षा से जुड़े कोचिंग सेंटरों को किराए पर देने की चर्चा है। जहां तक सौरभ भारद्वाज का यह कहना है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने बजट मे से केवल 116 करोड़ रुपए ही शिक्षा पर खर्च करता है, तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि सारे देश में नगर निगमों को प्राइमरी स्कूल चलाने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों से सर्व शिक्षा अभियान के तहत फंड्स मिलते हैं। नॉर्थ एमसीडी ही क्या, बल्कि कोई भी नगर निगम शिक्षा पर अलग से अपना खुद का बजट खर्च नहीं करती है।

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Author: Bulandaawaj

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