हाइलाइट्स

  • दिल्ली की ‘मम्मी जी’ ताजदार बाबर का 85 साल की उम्र में निधन
  • ताजदार बाबर मूल रूप से कश्मीरी थीं, विभाजन के बाद भारत में बसीं
  • तीन बार बाराखंभा रोड सीट से दिल्ली विधानसभा की मेंबर रहीं

नई दिल्ली
उन्हें सब मम्मी जी कहते थे और वह सबको बेटा। उनसे बड़ी उम्र के लोग भी उन्हें मम्मी जी ही कहना पसंद करते थे। सच में ताजदार बाबर दिल्ली की मम्मी जी ही थीं। ताजदार बाबर का शनिवार को निधन हो गया। वह 85 साल की थीं। 1993, 1998 और 2003 में मिंटो रोड-बाराखंभा रोड से वह दिल्ली विधानसभा के लिए चुनी गईं। यह खास बात नहीं है। खास बात यह है कि इस सीट पक 85 फीसदी वोटर गैर-मुसलमान थे। इसके बावजूद ताजदार बाबर चुनाव जीता करती थीं। उनके चुनाव में धर्म का मसला कभी आया ही नहीं।

दिल्ली ने अपनी मम्मी जी, एक बुजुर्ग नेता और सुख-दुख के साथी को खो दिया है। उन्होंने अपने एरिया में कभी शराब की दुकानें खुलने नहीं दीं। जो थीं वही चलती रहीं। उन्होंने 1960 के दशक में अरुणा आसफ अली, सुभद्रा जोशी और सरला शर्मा जैसी दिल्ली की प्रखर महिला कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर शराब की दुकानों को बंद करवाने के लिए कई बार आंदोलन चलाए।

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ताजदार बाबर मूल रूप से कश्मीरी थीं। उन्होंने शादी की थी डब्ल्यू. एम. बाबर नाम के एक पठान शख्स से। बाबर साहब देश के विभाजन के बाद मुसलमान होते हुए भी गांधी के देश भारत में आ गए थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू के कहने पर बाबर साहब ने आकाशवाणी की पश्तो सेवा शुरू की थी। उनका श्रीनगर तबादला हुआ। वहां पर उन्हें ताजदार भट्ट मिलीं जो शादी के बाद ताजदार बाबर हो गईं।

बाबर साहब का दिल्ली तबादला हुआ तो ताजदार बाबर 1955 में दिल्ली आ गईं। यहां पर औरतों के हकों के लिए काम करने लगीं। उनके पति को पंडारा रोड में सरकारी फ्लैट मिला तो वह बड़े अफसरों के सेवकों के बच्चों को पढ़ाने भी लगीं। उसके बाद कांग्रेस पार्टी से जुड़ गईं। तीन बार बाराखंभा रोड सीट से दिल्ली विधानसभा की मेंबर रहीं। उससे पहले वह महानगर पार्षद की मेंबर रहीं।

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ताजदार बाबर की मृत्यु की खबर जैसे ही बंगाली मार्केट, मिंटो रोड, लोदी रोड, भोगल जैसे इलाकों में फैली तो उनके चाहने वाले उनके ईस्ट निजामुद्दीन के घर की तरफ भागे। हालांकि वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ तो थीं पर किसी ने सोचा भी नहीं था कि उनकी मम्मीजी उन्हें छोड़कर चली जाएंगी।

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ताजदार बाबर 1994 में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) की चेयरपर्सन बनीं। दरअसल एनडीएमसी एरिया से सत्तारूढ़ दल का जो विधायक बनता था उसे एनडीएमसी में भी भेजा जाता था। ताजदार बाबर एनडीएमसी के चेयरपर्सन पद पर रहते हुए 108 राउज एवेन्यू में रहा करती थीं। वहां पर उनके घर में रोज दर्जनों लोग अपने काम के लिए आते। वह कभी किसी को निराश नहीं करतीं। एनडीएमसी के पूर्व डायरेक्टर (सूचना) मदन थपलियाल के मुताबिक, ताजदार के पति बाबर भी बेहद जिंदादिल शख्स थे। वह अपने घर में आने वालों को बड़ी ही गर्मजोशी से स्वागत करते थे।

याद नहीं कि ताजदार बाबर से पहले राजधानी में किसी जीवित इंसान के नाम पर मार्केट या सड़क का नाम रखा गया हो। इस लिहाज से ताजदार बाबर अपवाद थीं। उनके नाम पर लोदी रोड में ताजदार बाबर मार्केट है। ताजदार बाबर के बेटे फरहाद सूरी दिल्ली के पूर्व मेयर रहे हैं।

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Author: Bulandaawaj

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